Friday, 22 January 2016

सपनों के सौदागर

दो सपनों के सौदागर आपस में भिङ चुके हैं..
जब छोटे सपनों के सौदागर ने बड़े सपनों के सौदागर को करारी शिकस्त दी और यह दिखा दिया कि वह सपने बेचने में बड़े सौदागर से भी ज्यादा चालाक है, और भविष्य में उससे भी ज्यादा सपने बेच सकता है तो बड़ा सौदागर तिलमिला उठा. अपनी आदत के अनुसार उसने अपनी सारी शक्ति छोटे सौदागर को परेशान और बदनाम करने के लिए लगा दी..
छोटे सौदागर को दी जाने वाली सारी सुविधाएं काट ली गईं.
बड़े सौदागर के वर्दी धारी सिपाहियों ने छोटे का जीना हराम कर दिया था. छोटा अगर कुछ करना भी चाहे तो उसे ना करने दिया जा रहा था. हद तो तब हुई जब बड़े सपनों के सौदागर ने सादी वर्दी में सिपाहियों को और जासूसों को भेजकर छोटे सौदागर को परेशान करने का नया तरीका खोज निकाला. पूरे बाज़ार में हाहाकार मच गई. छोटे ने बड़े को आङे हाथ लेकर उसे डरपोक, सनकी, पागल और पता नहीं क्या-क्या कह डाला.
और अब तो सपनों के खरीददार भी आपस में भिड़ गए.. ये खरीददार तो तब भी बेवकूफ थे और अब भी बेवकूफ ही रह गए. उन्हें अब भी अपने सौदागरों पर यह यकीन था कि जो माल उन्होंने खरीदा है वह नकली नहीं है. बड़े से माल खरीदने वाले छोटे के पीछे पड़ गए और सरे बाजार उनकी बुराइयां करने लगे तो छोटे से माल खरीदने वाले बड़े के पीछे..
मैं आपको एक राज बताता हूं, मैंने भी इनसे कुछ खरीदा था, एक साल भी ना हुआ मेरे माल में फफूंद लग गए, कीड़े भी लगने लगे और मेरा माल सड़ गया.. मैंने इन से "आशा" खरीदी थी.. पर मैं बाकीयों जितना बेवकूफ नहीं था. मैंने आशा तो खरीदी थी लेकिन "उधार".. घाटे में तो मैं भी हूं लेकिन ज्यादा घाटा मुझे नहीं लगा है.

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