Friday, 22 January 2016

"What is the meaning of patriotism?"

The mentality of young India has increasingly been party-centric. They do not step back to abuse the entire "nation" if their party loses an election and they claim themselves to be ture patriots.
"What is the meaning of patriotism??"
Has the modern day patriotism been limited and degraded to a level of loyalty towards a particular party or the true meaning of patriotism is "inclusivity" for all? They look down on the country after their party loses and claim others to be anti-nationals. Hah.. Down with this mentality where party lies over the notion of your "nation" and the politicians lie over the citizens of the country.
आपके राष्ट्रवाद की ये संकुचित परिभाषा मुझे स्वीकार नहीं है.. मुबारक हो आपको ऐसा राष्ट्रवाद जहां आप बार-बार राष्ट्र से ही शर्मिंदा हो जाते है..

"बाबरी और राजनीति"

भले माफ ना करें लेकिन भलाई नई शुरुआत करने में ही है.. वरना नफरत और बदले की राजनीति का तो कोई अंत मुझे नहीं दिखता.. अगर मुद्दे को बेजान करना है तो दोनों तबको को नई शुरुआत करनी होगी .. वर्णा बाबरी और दादरी का अंतहीन सिलसिला चलता रहेगा और राजनीति की रोटियां सेंकी जाती रहेगी.. फिर ओवैसी भी रहेगा, भागवत भी, और बाकी यह छोटे-छोटे तुच्चे भी उनके फेेके हुए टुक ड़ों पर अपना पेट चलाते रहेंगे.. और कटे मरेंगे आम लोग..

"Police - The State Sponsored Terrorists"

There should be one more category of terrorists in Indian society, they are state sponsored terrorists, they are worthless, good for nothing, they terrorize the weak section of the society and show their complete inability in handling the situations where they are actually required.
"Police Terrorists"
Shame on "Delhi Police".. shame on state sponsored terrorism.. down with anti people and anti-education policy of NDA govt. ‪#‎OccupyUGC‬‪#‎CondemnPoliceLathicharge‬

सपनों के सौदागर

दो सपनों के सौदागर आपस में भिङ चुके हैं..
जब छोटे सपनों के सौदागर ने बड़े सपनों के सौदागर को करारी शिकस्त दी और यह दिखा दिया कि वह सपने बेचने में बड़े सौदागर से भी ज्यादा चालाक है, और भविष्य में उससे भी ज्यादा सपने बेच सकता है तो बड़ा सौदागर तिलमिला उठा. अपनी आदत के अनुसार उसने अपनी सारी शक्ति छोटे सौदागर को परेशान और बदनाम करने के लिए लगा दी..
छोटे सौदागर को दी जाने वाली सारी सुविधाएं काट ली गईं.
बड़े सौदागर के वर्दी धारी सिपाहियों ने छोटे का जीना हराम कर दिया था. छोटा अगर कुछ करना भी चाहे तो उसे ना करने दिया जा रहा था. हद तो तब हुई जब बड़े सपनों के सौदागर ने सादी वर्दी में सिपाहियों को और जासूसों को भेजकर छोटे सौदागर को परेशान करने का नया तरीका खोज निकाला. पूरे बाज़ार में हाहाकार मच गई. छोटे ने बड़े को आङे हाथ लेकर उसे डरपोक, सनकी, पागल और पता नहीं क्या-क्या कह डाला.
और अब तो सपनों के खरीददार भी आपस में भिड़ गए.. ये खरीददार तो तब भी बेवकूफ थे और अब भी बेवकूफ ही रह गए. उन्हें अब भी अपने सौदागरों पर यह यकीन था कि जो माल उन्होंने खरीदा है वह नकली नहीं है. बड़े से माल खरीदने वाले छोटे के पीछे पड़ गए और सरे बाजार उनकी बुराइयां करने लगे तो छोटे से माल खरीदने वाले बड़े के पीछे..
मैं आपको एक राज बताता हूं, मैंने भी इनसे कुछ खरीदा था, एक साल भी ना हुआ मेरे माल में फफूंद लग गए, कीड़े भी लगने लगे और मेरा माल सड़ गया.. मैंने इन से "आशा" खरीदी थी.. पर मैं बाकीयों जितना बेवकूफ नहीं था. मैंने आशा तो खरीदी थी लेकिन "उधार".. घाटे में तो मैं भी हूं लेकिन ज्यादा घाटा मुझे नहीं लगा है.

धर्म नहीं अधर्म

खून से सने धर्मों के खून के प्यासे अनुयाई पूरी दुनिया में तबाही मचाते चल रहे हैं. कभी दादरी तो कभी मालदा आम बात हो चली है. आप माने या न माने देश उस वक्त भी असहिष्णु था और आज भी असहिष्णु है. कारण एक ही है "धर्म". (मैं अभी 26/11, 9/11 तथा चार्ली हेब्दो की बात नहीं कर रहा, क्योंकि आज कल फैशन चला है ऐसे आतंकवादी गतिविधियों को धर्म से जोड़ कर नहीं देखा जाने का. खैर मैं आज एक नहीं बल्कि सभी धर्म के लोगों को चोट पहुंचाने की कोशिश करूंगा) खुद को शांतिपूर्ण बताने वाले ये सारे धर्म शांति का संदेश कभी दे ही नहीं सकते हैं.
आप एक बार इन धर्मों का साहित्य उठाकर देखें (जिन्हें आप धर्म ग्रंथ कहते हैं मैं उन्हें सिर्फ साहित्य कहता हूं) आपको सब रक्त रंजित दिखेगा. महाभारत, कुरान, बाइबल, रामायण, गुरु ग्रंथ सब में मारकाट, लड़ाई, युद्ध ज़रुर दिखाई देगा आपको. रक्तरंजित ये धर्म शांति का संदेश कबसे देने लगे? ये तो शुरु से ही हिंसक रहे हैं. ये धर्म नहीं अधर्म है. इन्होंने अपने अहिंसा तथा रक्त रंजित संदेशों को छुपाने के लिए शांति नाम के एक पर्दे का महज इस्तेमाल भर किया है. अगर यह धर्म ना होता तो विश्व में युद्धों की संख्या एक चौथाई होती.
( नोट: कृपया अपने अपने धर्मो का बचाव करते हुए मेरे इनबॉक्स तक ना आए)

Modi's development at the cost of social justice..!!

Under your guidance "Sir", a day will come when there will exist nothing known as "Labour-Law" in India. We will witness the "golden" day by our blinded eyes and will celebrate the victory of your vision with a broken back bone. 
We will welcome the centuries old "SERFDOM" in our country in a "NEO" form wrapped by your shiny-selfish-arbitrary-vision of Vikas. Thanks for your "one step forward" towards restoration of our old glorious history of human resource exploitation. This is the "start-up" of a race backward.

स्मृति ईरानी के "मानव-संसाधन" के विकास की जिम्मेदारी..

स्मृति ईरानी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरीके से झूठ बोला है और उस झूठ पर जोर डाल डाल कर उसे बार-बार दोहराया है कि, हैदराबाद विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष एक दलित शिक्षक थे, ( जबकि सच यह है कि इसके अध्यक्ष विपिन श्रीवास्तव नामक एक प्रोफ़ेसर थे) इस बात पर जरा सा भी चकित नहीं हूं क्योंकि यह वही स्मृति ईरानी है जिन्होंने अपनी डिग्री के बारे में लगातार झूठ बोला है. इन्होंने इतने झूठ बोले हैं कि इन्हें खुद याद नहीं रहता कि यह क्या बोल जाती हैं..
आश्चर्यचकित तो मैं इस बात से हूं कि इन्हें ऐसा मंत्रालय मिला है जिसके पास देश के "मानव-संसाधन" के विकास की जिम्मेदारी है.... मैं हंसू या रोऊं या किसी दीवार से टकरा कर अपना सर फोड़ लूं यह मेरे समझ से बाहर है..