स्मृति ईरानी ने अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जिस तरीके से झूठ बोला है और उस झूठ पर जोर डाल डाल कर उसे बार-बार दोहराया है कि, हैदराबाद विश्वविद्यालय के कार्यकारिणी समिति के अध्यक्ष एक दलित शिक्षक थे, ( जबकि सच यह है कि इसके अध्यक्ष विपिन श्रीवास्तव नामक एक प्रोफ़ेसर थे) इस बात पर जरा सा भी चकित नहीं हूं क्योंकि यह वही स्मृति ईरानी है जिन्होंने अपनी डिग्री के बारे में लगातार झूठ बोला है. इन्होंने इतने झूठ बोले हैं कि इन्हें खुद याद नहीं रहता कि यह क्या बोल जाती हैं..
आश्चर्यचकित तो मैं इस बात से हूं कि इन्हें ऐसा मंत्रालय मिला है जिसके पास देश के "मानव-संसाधन" के विकास की जिम्मेदारी है.... मैं हंसू या रोऊं या किसी दीवार से टकरा कर अपना सर फोड़ लूं यह मेरे समझ से बाहर है..
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