जेटली साहब का बजट भाषण कल रात मैंने सुना. करीब 1 घंटे 45 मिनट के भाषण में उन्होंने करीब 6 मिनट, अपने बजट के चौथे स्तंभ, शिक्षा तथा इससे संबंधित क्षेत्रों को दिया. उन के भाषण में मैंने यह कहीं नहीं सुना कि कुल शिक्षा बजट कितना है. अगर आपने सुना हो तो कृपया मुझे बता दें और अगर आपने भी नहीं सुना हो तो बताएं कि इसके कारण क्या क्या हो सकते हैं. उसके पहले कुछ जानकारियां दे देता हूं. संयुक्त राज्य अमेरिका शिक्षा पर अपने सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का कुल 5.5% तथा चीन 4% खर्च करता है. गौरतलब है कि इनका सकल घरेलू उत्पाद भारत से बहुत ज्यादा बङा है. यूनाइटेड किंगडम 5.5% तथा क्यूबा 14% केवल शिक्षा पर खर्च करते हैं तथा जर्मनी में उच्च शिक्षा मुफ्त है.
खैर हटाइए अब मुद्दे पर आते हैं.
खैर हटाइए अब मुद्दे पर आते हैं.
- सर्व शिक्षा अभियान के तहत अगले 2 सालों में 62 नए नवोदय विद्यालय खोलने का प्रस्ताव काबिल-ए-तारीफ है.
- जेटली जी ने कहा कि 10 सरकारी तथा 10 गैर सरकारी शिक्षण संस्थानों को विश्व स्तर के संस्थान बनाने के लिए सरकार कुछ नियामक प्रदान करेगी जिससे देश के आम नौजवानों को "क्वालिटि एजुकेशन" मुहय्या कराई जा सकेगी. इससे एक बात तो तय है कि प्राइवेट संस्थानों को "शिक्षण के बाजार" में उतारने की पूरी कोशिश की जा रही है. आपको ज्ञात हो कि हमारे देश में पहले से ही 94.57% शिक्षा का निजीकरण हो चुका है. इसके बावजूद परिणाम कुछ खास अच्छे नहीं आए. आप बखूबी जानते हैं की प्राइवेट संस्थानों में बच्चों को पढ़ाना कितना महंगा है. एक छोटे से कॉलेज से बच्चों को इंजीनियरिंग पढ़ाने में लगभग 6-8 लाख रुपए खर्च किए जाते हैं. और ये तो विश्व स्तर के संस्थान बनेंगे तथा जो "आम नौजवान" इसका फायदा उठा सकेंगे वह जाहिर तौर पर हमारे जैसे "आम" नहीं होंगे. प्राइवेट संस्थानों की फीस कितनी होगी, यह प्राइवेट संस्थान कौन होंगे, ये किन लोगों से जुड़े होंगे ( कॉर्पोरेट?), किस आधार पर इनका चुनाव किया जाएगा? और क्या ये 20 संस्थान काफी होंगे? इन सब मुद्दों पर पर सवाल उठाना जरूरी है.
- Higher Education Financing Agency (HEFA), जिसके गठन की बात जेटली जी ने की, उसके लिए एक हजार करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं. HEFA "बाज़ार" से फंड उठाकर उसे अनुदान तथा कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) के साथ मिला कर उच्च शिक्षा के लिए फंड जुटाएगी. इस फंड का इस्तेमाल इंफ्रास्ट्रक्चर तथा अन्य व्यवस्थाओं के लिए होगा. क्या HEFA इतने फंड जुटा पाएगा की भारत के उच्च शिक्षा तथा शोध की सभी जरूरतें पूरी हो सके? HEFA का भविष्य क्या होगा? क्या आने वाले दिनों में उच्च शिक्षा को सरकार HEFA के भरोसे छोड़ने वाली है? क्या विभिन्न फेलोशिप का ठीका भी HEFA को दे दिया जाएगा? अभी इन बातों का सिर्फ अंदाजा लगाया जा सकता है क्योंकि सरकार ने अभी इसका खाका तैयार नहीं किया है.
- नॉन-नेट फेलोशिप का क्या होगा? सरकार ने उच्च शिक्षा के छेत्र में जो बजट की कटौती पिछले साल की थी, क्या उसकी भरपाई हुई? उच्च शिक्षा से इस सब्सिडी (फेलोशिप) को हटाना क्या "WTO प्लस" (शायद Trade in Services Agreement) की तरफ सरकार के रुझान को दिखाता है? अगर ऐसा हुआ तो उच्च शिक्षा से आम नौजवान तो बहुत दूर हो जाएंगे. शोध उनके बस की बात नहीं होगी.
- कौशल विकास (skill development) के लिए प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत 1700 करोड़ का बजट आवंटन स्वागत योग्य कदम है. परंतु उच्च शिक्षा के प्रति सौतेला व्यवहार क्यों? क्या हम भारत को उच्च शिक्षा तथा शोध से दूर करके सिर्फ ड्राईवर, प्लंबर, और कुक का देश बनाएंगे और मेक इन इंडिया जैसे बिना सिर-पैर के सपनों के लिए स्किल्ड लेबर का देश?
- उद्यमी बनने के इच्छुक छात्रों के लिए ऑनलाइन शिक्षा (Mass Open Online Courses) से छात्रों का कुछ खास भला होने वाला नहीं है. फिर भी ठीक है, हमारे देश में ऐसी चीजे होनी चाहिए.
- शिक्षण से जुड़े ज्यादातर क्षेत्रों को अनियोजित बजट के अंतर्गत रखा गया है.
अंत में बस यही कहना चाहूंगा कि ऐसा लगता है जैसे उच्च शिक्षा हमारे बजट से बाहर की चीज है.
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