एक तरफ जब पूरे विश्व में उच्च शिक्षा पर जोर दिया जा रहा है तब हमारे देश भारत में छात्रों को उच्च शिक्षा से दूर करके भारत को मजदूरों का देश बनाने का षड़यंत्र किया जा रहा है.
गॉर तलब है की 15 अगस्त 2014 के भाषण में नरेंद्र मोदी ने "कम, मेक इन इंडिया" तथा स्किल डेवलपमेंट पर बहुत जोर दिया था.. मोदी ने ड्राइवर, पलंबर, कुक जैसे व्यवसाय पर जोर देते हुए कहा था कि स्किल डेवलपमेंट के काम को बहुत तेजी से आगे ले जाएंगे. उनके भाषण में कहीं यह जिक्र नहीं था कि उच्च शिक्षा, शोध इत्यादि को कैसे आगे बढ़ाया जाए.
लोग कम पढ़े लिखे होंगे, मजदूर ज्यादा होंगे, शोषण ज्यादा हो सकेगा वरणा कोई क्यों हिंदुस्तान में निर्माण करेगा? अगर पृष्ठभूमि तैयार नहीं की गई तो मेक इन इंडिया की तो भ्रुण हत्या ही हो जाएगी..
गॉर तलब है की 15 अगस्त 2014 के भाषण में नरेंद्र मोदी ने "कम, मेक इन इंडिया" तथा स्किल डेवलपमेंट पर बहुत जोर दिया था.. मोदी ने ड्राइवर, पलंबर, कुक जैसे व्यवसाय पर जोर देते हुए कहा था कि स्किल डेवलपमेंट के काम को बहुत तेजी से आगे ले जाएंगे. उनके भाषण में कहीं यह जिक्र नहीं था कि उच्च शिक्षा, शोध इत्यादि को कैसे आगे बढ़ाया जाए.
लोग कम पढ़े लिखे होंगे, मजदूर ज्यादा होंगे, शोषण ज्यादा हो सकेगा वरणा कोई क्यों हिंदुस्तान में निर्माण करेगा? अगर पृष्ठभूमि तैयार नहीं की गई तो मेक इन इंडिया की तो भ्रुण हत्या ही हो जाएगी..
एक ऐसी स्त्री को मानव संसाधन मंत्री बनाया गया जिसके डिग्री का कोई अता-पता नहीं है.. हाहाहाहा..
इसी के साथ शिक्षा बजट में 17 प्रतिशत की कटौती की गई, और अकेले उच्च शिक्षा के लिए दिए जाने वाले 800 करोड़ रूपए काट लिए गए.
ऐसे में तय था कि:
नए स्कूल कॉलेज नहीं खोले जाएंगे
नए शिक्षकों की बहाली नहीं होगी
नॉन नेट जैसी छात्रवृत्तियां काटी जाएंगी ( शायद अब MCM की बारी है.. हाहा)
पढ़ाई-लिखाई पर कम ध्यान दिया जाएगा
उच्च शिक्षा और शोध तो भूल ही जाइए
ऐसे में तय था कि:
नए स्कूल कॉलेज नहीं खोले जाएंगे
नए शिक्षकों की बहाली नहीं होगी
नॉन नेट जैसी छात्रवृत्तियां काटी जाएंगी ( शायद अब MCM की बारी है.. हाहा)
पढ़ाई-लिखाई पर कम ध्यान दिया जाएगा
उच्च शिक्षा और शोध तो भूल ही जाइए
बाल श्रम कानून में बदलाव ला कर श्रमिकों की उम्र सीमा 18 से घटाकर 14 साल कर दी गई. (इसे भी मेक इन इंडिया के मजदूर सप्लाई से जोड़कर देखा जा सकता है,) बच्चों की पढ़ाई लिखाई जाए तेल लेने..
खुद चाय बेच कर प्रधानमंत्री के कुर्सी तक पहुंचने वाले मोदी को यह लगता है हिंदुस्तान का हर मजदूर प्रधानमंत्री तो नहीं लेकिन IAS जरूर बन सकता है ( शायद इसलिए पढ़ाई-लिखाई जरुरी नहीं है)
इसके बाद बड़ी शांति से श्रम कानून में भी बदलाव लाए गए
गुजरात के तर्ज पर भारत को विकसित बनाने का दावा करने वाले मोदी शिक्षा के मामले में भारत को गुजरात जैसा जरुर बना देंगे. आप को शायद पता होगा कि प्राथमिक शिक्षा (access to elementary education) के मामले में गुजरात 35 राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों में से 34वे स्थान पर है..
शिक्षा को लेकर मोदी सरकार की मानसिकता हमारे सामने है..
आप अंदाजा लगा सकते है कि शिक्षा के बिना हमारा देश कितना विकसित हो सकता है.. और विकास के मसीहा मोदी देश को किस राह पर ले जाना चाहते है..
शिक्षा को लेकर मोदी सरकार की मानसिकता हमारे सामने है..
आप अंदाजा लगा सकते है कि शिक्षा के बिना हमारा देश कितना विकसित हो सकता है.. और विकास के मसीहा मोदी देश को किस राह पर ले जाना चाहते है..
यह सब एक सोची समझी रणनीति के तहत हो रहा है.
TPP, TTIP और TISA जैसे मेगा ट्रेड डील भी इसका एक हिस्सा हो सकते है..
TPP, TTIP और TISA जैसे मेगा ट्रेड डील भी इसका एक हिस्सा हो सकते है..
अब आप इतने समझदार तो होंगे ही कि "मेक इन इंडिया" और शिक्षा बजट की कटौती के बीच के रिश्ते को समझ सके..

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